ऐसे ग्रहण करते हैं देवता आपके द्वारा लगाया गया भोग, जानिए...

ऐसे ग्रहण करते हैं देवता आपके द्वारा लगाया गया भोग, जानिए...
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हिन्दू धर्म में देवी-देवताओं, आराध्य, पितृ और भगवान को प्रतिदिन भोग लगाने का विधान है। तथा लोग अपने घरों में प्रतिदिन भगवान को भोग लगाते भी हैं। तो क्या सच में देवी-देवता, पितृ और भगवान हमारे द्वारा लगाए गए भोग को ग्रहण करते हैं या नहीं, आइए जानते हैं इसके बारे में।

हिन्दू धर्म में देवी-देवताओं, आराध्य, पितृ और भगवान को प्रतिदिन भोग लगाने का विधान है। तथा लोग अपने घरों में प्रतिदिन भगवान को भोग लगाते भी हैं। तो क्या सच में देवी-देवता, पितृ और भगवान हमारे द्वारा लगाए गए भोग को ग्रहण करते हैं या नहीं, आइए जानते हैं इसके बारे में।

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पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति ।

तदहं भक्त्युपहृतमश्नामि प्रयतात्मनः ॥

गीता के नौवे अध्याय के 26 वें श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि जो भक्त मेरे लिए प्रेम से पत्र, पुष्प, फल, जल आदि वस्तुएं अर्पित करता है, उस भक्त का प्रेम पूर्वक अर्पित किया हुआ, वह पत्र और पुष्प आदि मैं ग्रहण करता हूं।

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भगवान ऐसे ग्रहण करते हैं भोग

आप लोग जो भोजन ग्रहण करते हैं, वह भोजन पांच तत्वों से बनता है। और वहीं हमारा शरीर भी पांच तत्वों से निर्मित है। अत: हमें अन्न, जल, वायु, प्रकाश और आकाश यानि इन्हीं पांच तत्वों की आवश्यकता हमें स्वस्थ रहने के लिए होती है, जिसे हम लोग अन्न और जल आदि के से प्राप्त कर लेते हैं। देवताओं का शरीर पांच तत्वों से रहित होता है। देवताओं के शरीर में पृथ्वी और जल तत्व नहीं होता है। वहीं मध्यम स्तर के देवताओं का शरीर तीन तत्वों से निर्मित होता है। तथा उत्तम स्तर के

देवताओं का शरीर दो तत्व यानि तेज और आकाश से निर्मित होता है। इसलिए देव शरीर वायुमय और तेजमय होते हैं। इसलिए देवता वायु के रूप में गंध को ग्रहण करते हैं। और तेज के रूप में प्रकाश को ग्रहण को ग्रहण करते हैं। तथा आकाश के रूप में शब्द को ग्रहण कर लेते हैं। यानी देवता गंध, प्रकाश और शब्द के द्वारा हमारे द्वारा अर्पित किए गए भोग ग्रहण करते हैं। जैसे हम लोग अपने घरों में देवताओं को जिस अन्न का भोग लगाते हैं, देवता उस अन्न यानि भोजन की गंध को ग्रहण करते हैं। और उस गंध से ही उन देवताओं की तृप्ति हो जाती है।

हम पूजा के दौरान जो पुष्प देवताओं को अर्पित करते हैं और धूप-दीप आदि जलाते हैं, भगवान उन वस्तुओं की सुगंध को भोग के रूप में ग्रहण कर लेते हैं। पूजा में आप लोग दीपक जलाते हैं, देवता लोग उस दीपक के प्रकाश तत्व को भी ग्रहण करते हैं।

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