फ्लू को भी समझ रहे Omicron तो एक्सपर्ट्स से जानें क्या है अंतर

Winter Health Tips: इन दिनों मौसम काफी ठंडा हो गया है। आने वाले दिनों में सर्दी और बढ़ेगी। इस दौरान सर्दी से बचने के अलावा इस मौसम में होने वाले संक्रामक रोगों से बचाव भी जरूरी है। एक तरफ जहां पूरी दुनिया में कोरोना के नए वेरिएंट ओमीक्रॉन (Omicron) का खतरा मंडरा रहा है। वहीं दूसरी और आपको फ्लू भी इस सीजन में हो सकता है। कुछ लोग फ्लू को ही कोरोना समझ लेते हैं और घबरा जाते हैं। यहां नई दिल्ली सर गंगा राम अस्पताल के सीनियर फिजिशियन डॉ. मोहसिन वली की ओर से फ्लू और कोरोना में क्या अंतर है इसके बारे में बताया जा रहा है। ताकि आप फ्लू का सही समय पर इलाज करा सकें।
क्या होता है फ्लू
फ्लू वायरस के कारण होने वाला श्वसन संक्रमण है, जो इंसान के फेफड़ों को प्रभावित करता है। आमतौर पर कम तापमान, वातावरण में मौजूद वायरस कई तरह के इंफेक्शन और एलर्जी के कारक बनते हैं, जिनसे नजला, खांसी-जुकाम, सिर दर्द, बुखार जैसी समस्याएं घर-घर देखी जा सकती हैं। लेकिन फ्लू के मामले गंभीर हो सकते हैं और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए घातक हो सकते हैं।
किन लोगों को ज्यादा होता है फ्लू का खतरा
नेशनल सेंटर फॉर बॉयोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (एनसीबीआई) के अनुसार फ्लू का सबसे ज्यादा खतरा 5 साल से कम उम्र के बच्चों, 65 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों और पुरानी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को होता है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) भी कोविड वैक्सीन के साथ नवंबर-दिसंबर में फ्लू शॉट्स यानी फ्लू वैक्सीन लेने की सिफारिश करता है। क्योंकि फ्लू शॉट्स रोग प्रतिरोधक क्षमता का निर्माण और कोरोना से जुड़ी श्वसन संबंधी जटिलताओं के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकता है। कुछ समय पहले ब्राजील के शोधकर्ताओं ने भी इस बात की पुष्टि की है कि फ्लू शॉट्स लेने वाले व्यक्तियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्राकृतिक रूप से बढ़ गई थी। जिससे उनमें कोविड के गंभीर संक्रमण होने और मृत्यु दर में 20 प्रतिशत की कमी पाई गई।
रोग के प्रमुख लक्षण
आमतौर पर फ्लू को जुकाम से जोड़कर देखा जाता है लेकिन फ्लू जुकाम से ज्यादा खतरनाक होता है। सामान्य सर्दी-जुकाम जहां एक सप्ताह में ठीक हो जाता है, वहीं इंफ्लुएंजा और स्वाइन जैसे वायरल फ्लू लंबे समय तक बने रहते हैं और फेफड़ों को प्रभावित करते हैं। मौजूदा दौर में श्वसन संक्रमण, कोरोना महामारी का भी बड़ा कारण है। इसे देखते हुए कोरोना और फ्लू दोनों एक जैसे लगते हैं, होने की आशंका रहती है। लेकिन इनके लक्षणों में कुछ असमानताएं मिलती हैं, जिनके आधार पर इनमें फर्क किया जा सकता है।
फ्लू और कोरोना में अंतर
-फ्लू, बदलते मौसम में बिना किसी के संपर्क में आए, वातावरण में मौजूद वायरस से या सर्दी लगने से होता है। लेकिन कोरोना तभी होता है, जब आप किसी संक्रमित के संपर्क में आते हैं।
-फ्लू में संक्रमण नाक बहने से शुरू होता है और गले तक जाता है। जबकि कोरोना में वायरस सबसे पहले व्यक्ति के गले में ड्राई कफ बनाता है। बाद में यह फेफड़ों तक पहुंच जाता है, जिससे व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी होती है।
-हालांकि बुखार दोनों में आता है, लेकिन फ्लू में बुखार के साथ जुकाम, छींकें आना, नाक बहना, सिर दर्द, खांसी और गला खराब होता है। जबकि कोरोना में बुखार के साथ सूखी खांसी होती है, जिससे आगे चलकर मरीज को सांस लेने में दिक्कत होती है।
-दवाई लेने पर फ्लू 3-4 दिन में कम हो जाता है, जबकि कोरोना के लक्षण 3-4 दिन में बढ़ने से समस्या गंभीर हो जाती है।
-फ्लू में बुखार के साथ खांसी, बदन और सिर में असहनीय दर्द, उल्टियां भी आती हैं। कोरोना में वॉमिटिंग नहीं आती, मरीज को डायरिया हो सकता है।
ओमीक्रॉन के लक्षण
-ज्यादा थकान महसूस होना
-मांसपेशियों में हल्का दर्द होना
-गले में खराश जैसा महसूस होना
-सूखी खांसी
-हल्का तेज बुखार
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