पतंग के चक्कर में हाईवोल्टेज तारों में उलझा पांच साल का मासूम, इलाज के लिए तड़पता रहा

हरिभूमि न्यूज : रेवाड़ी
कोरोना काल के बीच बुधवार को ट्रॉमा सेंटर (Trauma center) में एक विचलित करने वाली तस्वीर देखने को मिली। हाईटेंशन तारों की चपेट में आकर झुलसा एक पांच साल का मासूम इलाज (Treatment) के लिए करीब पौने घंटे तक ट्रॉमा सेंटर में तड़पता रहा। अधिकारियों की तरफ से तर्क दिया गया कि ड्यूटी पर कार्यरत डॉक्टर ने तुरंत इलाज शुरू कर दिया था। बच्चे के इलाज के लिए सर्जन को बुलाया गया था, परंतु एमरजेंसी में होने की वजह से सर्जन को कुछ समय लगा। इससे पहले भाजपा प्रदेश प्रवक्ता वंदना पोपली, एडवोकेट कैलाश चंद व चाइल्ड वेलफेयर से संबंधित एक अधिकारी ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। प्राथमिक उपचार के बाद बच्चे की गंभीर हालत देख उसे रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया गया।
शहर के अर्जुन नगर में अपने परिवार सहित किराए पर रहने वाले रणविजय का पांच वर्षीय बेटा नितिन बुधवार की दोपहर अपने घर की छत पर था। इसी दौरान एक कटी हुई पतंग को पकड़ने के चक्कर में वह पास के ही बंद पड़े मकान की छत पर चला गया। उस मकान की छत के उपर हाईटेंशन वायर गुजर रही थी। पतंग को पकड़ने के चक्कर में नितिन हाईटेंशन तारों की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गया और मकान की छत से नीचे गिर गया। हादसे के वक्त उसके पिता रणविजय राजमिस्त्री का काम करने और मां बावल कंपनी में ड्यूटी पर गई हुई थी। अतुल नाम के पड़ोसी ने बंद मकान का ताला तोड़ा और फिर बच्चे को उपचार के लिए ट्रॉमा सेंटर आया।
ट्रॉमा सेंटर में हुआ ड्रामा
नितिन को गंभीर अवस्था में पड़ोसी अतुल ट्रॉमा सेंटर लेकर पहुंचा। इससे पहले उसने नितिन के माता-पिता को भी सूचना दे दी। आरोप है कि पहले तो स्टाफ नर्स से लेकर अन्य स्टाफ ने देखा ही नहीं। उसके बाद डॉक्टर का इंतजार करते रहे। मासूम नितिन स्ट्रैचर पर ही कहराता रहा। काफी देर बाद भी जब कोई इलाज के लिए नहीं पहुंचा तो किसी ने इसकी सूचना भाजपा प्रदेश प्रवक्ता वंदना पोपली को दे दी। इसी बीच सामाजिक कार्य करने वाले एडवोकेट कैलाश चंद भी पहुंच गए। दोनों ने हस्ताक्षेप किया तो एक डॉक्टर बच्चे के इलाज के लिए पहुंचा। उसने गंभीर अवस्था होने पर बच्चे को रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया है।
सर्जन के इंतजार में लगा समय
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता वंदना पोपली ने कहा कि मुझे बच्चे से संबंधित सूचना मिली थी। उसके बाद ट्रामा सेंटर पहुंची तो वहां डॉक्टर बच्चे का इलाज शुरू कर चुके थे। जानकारी लेने पर पता चला कि ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने बच्चे का इलाज शुरू कर दिया था। जबकि सर्जन के इंतजार में कुछ समय लगा था।
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