Mustard Oil : कच्ची घानी तेल के नाम पर हैफेड का खेल, प्राइवेट फर्मों से खरीदकर की जा रही बिक्री

Mustard Oil : कच्ची घानी तेल के नाम पर हैफेड का खेल, प्राइवेट फर्मों से खरीदकर की जा रही बिक्री
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हैफेड का कच्ची घानी सरसों का तेल मशहूर हो चुका है। खाद्य तेलों के मामले में हैफेड के सरसों तेल पर लोग आंख बंद करके विश्वास करते हैं। इस तेल की हैफेड के मिल आउटलेट पर ही अच्छी खासी बिक्री हो जाती है।

नरेन्द्र वत्स. रेवाड़ी

सरकारी एजेंसी हैफेड का कच्ची घानी सरसों का तेल अपने आप में एक ब्रांड बना हुआ है। हैफेड की तेल मिल मेंटिनेंस और रिन्यवेशन कार्य के चलते कई माह से बंद पड़ी है। हैफेड प्राइवेट फर्मों से सरसों का तेल खरीदकर इसे बाजार में उतार रहा है। प्राइवेट फर्मों के सेंपल फेल होने से यह फर्म हैफेड की साख को बट्टा लगा रही हैं। तेल की सैंपलिंग करने के बाद उसे जांच के लिए दिल्ली प्रयोगशाला में भेजा जाता है। वहां से रिपोर्ट आने से पहले ही पैकिंग और लेबलिंग के बाद तेल को बाजार में बेच दिया जाता है।

हैफेड का कच्ची घानी सरसों का तेल मशहूर हो चुका है। खाद्य तेलों के मामले में हैफेड के सरसों तेल पर लोग आंख बंद करके विश्वास करते हैं। इस तेल की हैफेड के मिल आउटलेट पर ही अच्छी खासी बिक्री हो जाती है। प्रदेश भर में हैफेड मिल के सरसों तेल की बिक्री की जाती है। हैफेड प्रबंधन की ओर से मशीनों के नवीकरण और मरम्मत का कार्य करीब 6 माह पूर्व शुरू किया गया था। इसके बाद से इसकी अपनी तेल मिल पूरी तरह बंद पड़ी है। बाजार में सरसों के तेल की आपूर्ति जारी रखने के लिए हैफेड ने प्राइवेट फर्मों से तेल खरीदकर उस पर अपनी पैकिंग और लेबलिंग का कार्य शुरू किया हुआ है।

हैफेड राजस्थान के श्रीगंगानगर और रोहतक की तेल मिलों से सरसों के तेल की खरीद कर रहा है। सूत्रों के अनुसार औसत 10 टन तेल हैफेड की कोनसीवास मिल पर आता है। इस तेल की गुणवत्ता को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार बाजार में सरसों के तेल की मांग को पूरा करने के लिए सप्लाई आने के बाद तेल के सैंपल लेकर लैब भेज दिए जाते हैं, परंतु लैब से शुद्धता की रिपोर्ट आने तक इंतजार नहीं किया जाता। टैंकरों में आने वाले तेल को तत्काल हैफेड की पैकिंग करने के बाद मार्केट में उतार दिया जाता है। जब तक सैंपल की रिपोर्ट आती है, तब तक तेल की बिक्री हो चुकी होती है। तेल के इस खेल में हैफेड के अधिकारियों और प्राइवेट मिल मालिकों के बीच सांठगांठ की सभावनाओं से भी इंकार नहीं किया जा सकता। नारनौल में भी एक फर्म का सेंपल फेल हुआ था, परंतु इसकी रिपोर्ट आने से पहले बाजार में पहुंच चुका था।

सेंपल फेल होने के बाद दबा दिया मामला

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एक फर्म का सेंपल मई माह के अंत में फेल पाया गया था। इससे तेल की गुणवत्ता संदेह के दायरे में आ चुकी थी। रिपोर्ट आने तक तेल बाजार में बिक चुका था। संबंधित फर्म के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय मामले को पूरी तरह दबा दिया गया। ऐसे में यह माना जा सकता है कि तेल के इस खेल में हैफेड के अधिकारी लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने में पीछे नहीं हैं। लोग जिसे हैफेड का कच्ची घानी तेल समझकर खरीद रहे हैं, वह प्राइवेट तेल मिलों का है। सेंपल की रिपोर्ट बदलवाने का खेल भी चल रहा है, परंतु अधिकारी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं।

कच्ची घानी का होने की भी नहीं कोई गारंटी

कच्ची घानी सरसों के तेल को भोजन में इस्तेमाल करने के लिए पूरी तरह शुद्ध और पौष्टिक माना जाता है। यह तेल सरसों की कोल्हू में पिराई से तैयार किया जाता है। पहले सरसों का चूरा बना जाता है। इसके बाद चूरे से खल और तेल अलग किए जाते हैं। सरसों के चूरे से तैयार तेल की क्वालिटी काफी अच्छी होती है, जिस कारण लोग इसे ज्यादा पसंद करते हैं। अधिकांश प्राइवेट मिलों में सरसों को सीधे मशीन में डालकर उससे तेल तैयार किया जाता है, जिसकी गुणवत्ता कच्ची घानी तेल से खराब होती है।

मैंने अभी-अभी कार्यभार संभाला है। मेरे सामने ऐसा कोई मामला नहीं आया है। संबंधित कर्मचारियों को निर्देश दिए हुए हैं कि सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद ही तेल को मार्केट में भेजा जाए। जल्द ही हमारी मिल शुरू होने वाली है, जिसके बाद प्राइवेट फर्मों से तेल की खरीद बंद कर दी जाएगी। -रामकुमार, जीएम, हैफेड।

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