UP Panchayat Election: गांवों में पंचायत चुनाव की तैयारियां जोरों पर, वोटरों को लुभाने के लिए प्रत्याशी अपना रहे ये हथकंडे

UP Panchayat Election: गांवों में पंचायत चुनाव की तैयारियां जोरों पर, वोटरों को लुभाने के लिए प्रत्याशी अपना रहे ये हथकंडे
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UP Panchayat Election: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं। हर गांव में वोटरों को लुभाने के लिए प्रत्याशी मैदान में आ चुकें हैं। प्रत्याशी रात-दिन जमकर महेनत कर रहे हैं। इस बर्ष होने वाले पंचायत चुनाव में दावेदारों का ध्यान अपने गांव क्षेत्र के युवा वोटरों पर है।

UP Panchayat Election: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं। हर गांव में वोटरों को लुभाने के लिए प्रत्याशी मैदान में आ चुकें हैं। प्रत्याशी रात-दिन जमकर महेनत कर रहे हैं। इस बर्ष होने वाले पंचायत चुनाव में दावेदारों का ध्यान अपने गांव के युवा वोटरों पर है। प्रत्याशी चाहते हैं कि युवा वोटर ना सिर्फ उनका समर्थन करें बल्कि जन-जन तक उनकी बात को पहुंचाएं। इसके बदले दावेदार जीत के बाद उन्हें खेल मैदान, खेल सामग्री, जिम आदि सुविधाएं मुहैया कराने का आश्वासन भी दे रहे हैं। आए दिन हर दावेदार युवा वोटरों को लुभाने के लिए नई योजना सामने लेकर आ रहा है।

जैसे-जैसे पंचायत चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे दावेदारों के दिल की धड़कन भी तेज होने लगी है। दावेदार हर हथकंडा अपनाते हुए वोटरों को अपने पक्ष में करने प्रयास कर रहे हैं। दावेदारों ने युवाओं पर डोरे डालने शुरू कर दिए हैं। प्रत्याशियों की इस तैयारी के बाद युवा वोटर भी पीछे रहने के मूड में नहीं है। जिन गांव में युवा खेल सुविधाएं चाहते हैं, वह अपने पसंद के प्रत्याशी से उस सामग्री व संसाधनों की मांग कर रहे हैं। आगामी पंचायत चुनाव में कौन प्रत्याशी वोटरों को अपने पक्ष में खींच पाता है और कौन युवा वोटरों की उम्मीदों पर कायम रह पाता यह आने वाला समय ही बताएगा।

प्रधान पद के दावेदारों में इस बात को लेकर है सबसे ज्यादा बैचेनी

पंचायत चुनाव के दावेदारों में सबसे ज्यादा बैचेनी आरक्षण को लेकर देखी जा रही हैं। इसके बाद ही तय होगा कि किस गांव में किस जाति का उम्मीदवार चुनाव लड़ सकता है। क्योंकि गांव अगर आरक्षित हो गया तो सामान्य जाति के लोग वहां से चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। इसी तरह अगर गांव महिला के लिए आरक्षित हो गया तो वहां से कोई पुरुष पर्चा नहीं भर सकता। पंचायत चुनाव में सर्वाधिक विवाद सीटों के आरक्षण तय करने में फंसता है।

हर सीट पर प्रत्येक वर्ग को प्रतिनिधित्व को 1995 से चक्रानुक्रम आरक्षण व्यवस्था लागू हुई। हालांकि इस साल अभी फार्मूले का ही इंतज़ार हैं लेकिन डीपीआरओ ऑफिस के अनुसार, पारदर्शिता के चलते पंचायत चुनाव-2020 नाम से साफ्टवेयर पर पंचायतों की आबादी व आरक्षण का ब्यौरा आदि अपलोड किया जा रहा हैं। अधिकारियों का कहना है चुनावी प्रक्रिया आरंभ होते ही शासन के फैसलेनुसार साफ्टवेयर से आरक्षण तय हो जाएगा।

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