सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की EC की याचिका, कहा- अदालत की कार्यवाही की कवरेज से मीडिया को नहीं रोक सकते

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की EC की याचिका, कहा- अदालत की कार्यवाही की कवरेज से मीडिया को नहीं रोक सकते
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जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि अदालत (Court) तक खुली पहुंच संवैधानिक स्वतंत्रता (Constitutional freedom) का आधार है। अनुच्छेद 19 1ए (Article 19 1a) प्रेस की स्वतंत्रता (freedom of press) को कवर करता है।

सुप्रीम कोर्ट ने आज मद्रास हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की मौखिक टिप्पणी की रिपोर्टिंग से मीडिया को प्रतिबंधित करने के लिए भारतीय चुनाव आयोग द्वारा की गई याचिका को खारिज कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस चंद्रचूड़ (Justice Chandrachud) का कहना है कि दो संवैधानिक प्राधिकारियों के अधिकारों को संतुलित करने के नाजुक सवाल ने मीडिया (Media) की भूमिका पर सवाल उठाया है।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि अदालत (Court) तक खुली पहुंच संवैधानिक स्वतंत्रता (Constitutional freedom) का आधार है। अनुच्छेद 19 1ए (Article 19 1a) प्रेस की स्वतंत्रता (freedom of press) को कवर करता है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of expression) को भी कोर्ट की कार्यवाही को कवर करने की स्वतंत्रता (freedom) को शामिल किया गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आगे कहा कि इंटरनेट (Internet) ने कोर्ट रूम (Court Room) की रिपोर्टिंग को क्रांति (Revolution) दी है।

गुजरात हाईकोर्ट ने भी ऐसा करने की अनुमति दी

जस्टिस चंद्रचूड़ (Justice Chandrachud) का कहना है कि अब लोग अधिक डिजिटल ओरेटेड (Digital Orated) हो गए है। जानकारी के लिए इंटरनेट (Internet) पर ज्यादा ध्यान देते है। इसलिए किसी नए माध्यम को कार्यवाही की रिपोर्ट (Report) करने से रोकना अच्छा नहीं होगा। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा अंतरराष्ट्रीय कोर्ट (International court) ने लाइव स्ट्रीमिंग (Live streaming) की अनुमति दी है, गुजरात हाईकोर्ट (Gujrat high court) ने भी ऐसा करने की अनुमति दी है।

सुनवाई के दौरान की जाने वाली टिप्पणियां निर्णय का हिस्सा कतई नहीं है, यह समाधान का ही अंग हैं। जोकि दोनों पक्षों के विचारों पर विपरीत निर्वाचन करती हैं। यदि इस अभिव्यक्ति को हतोत्साहित किया गया तो इंसाफ (justice) करने की प्रक्रिया बंद हो जाएगी। जानकारी के अनुसार, चुनाव आयोग (Election commission) पर हत्या (Murder) का मामला चलाने वाली मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) की टिप्पणी के खिलाफ याचिका (Petition) पर एससी ने फैसला सुनाते हुए कहा कि हाईकोर्ट (Hingh Court) लोगों की तकलीफ से परेशान था। टिप्पणी कठोर थी पर मौखिक टिप्पणी (Oral comment) समय के साथ अतीत की बात हो जाती है। रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं होती। इसलिए उसे हटाने का सवाल नहीं।

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