Bhopal Traffic Signal : 65 चौराहों में से 55 चौराहे के ट्रैफिक सिग्नल चल रहे ब्लिंकर मोड में
स्मार्ट सिटी कंपनी का सभी चौराहे पर ऑटोमेटिक ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम (एटीसीएस) शुरू होने के बाद भी 90 फीसदी ट्रैफिक सिग्नल ब्लिंकर मोड में चल रहे हैं। इससे न तो ट्रैफिक कंट्रोल हो पा रहा है और न ही चौराहे पर जाम से राहत मिल पा रही है। साथ ही कब और कौनसा ट्रैफिक सिग्नल बंद होगा और कौनसा चालू, इसका भी अंदाजा नहीं लग रहा है।;
भोपाल। स्मार्ट सिटी कंपनी का सभी चौराहे पर ऑटोमेटिक ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम (एटीसीएस) शुरू होने के बाद भी 90 फीसदी ट्रैफिक सिग्नल ब्लिंकर मोड में चल रहे हैं। इससे न तो ट्रैफिक कंट्रोल हो पा रहा है और न ही चौराहे पर जाम से राहत मिल पा रही है। साथ ही कब और कौनसा ट्रैफिक सिग्नल बंद होगा और कौनसा चालू, इसका भी अंदाजा नहीं लग रहा है।
ट्रैफिक सिग्नल ब्लिंकर मोड
स्मार्ट सिटी कंपनी के अनुसार ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने के लिए पूरे शहर में ट्रैफिक सिग्नल को एटीसीएस सिस्टम से जोड़ दिया गया है। ट्रैफिक पुलिस के कंट्रोल में अब कोई भी सिग्नल नहीं है। पुलिस के द्वारा कंपनी को सूची भेजकर कहा जाता है कि इन चौराहों के ट्रैफिक सिग्नल को ब्लिंकर मोड में कर दिया जाए। इस समय 65 में से 55 चौराहे के ट्रैफिक सिग्नल एटीसीएस सिस्टम की जगह ब्लिंकर मोड में कर दिए गए हैं।
सिग्नल का पालन करने वालों को परेशानी
वाहन चालकों के अनुसार ब्लिंकर मोड में ट्रैफिक सिग्नल को करने से किसी को राहत नहीं है। जबकि इससे परेशानी और ज्यादा बढ़ जाती है। क्योंकि सिग्नल का पालन करने वाले ब्लिंकर मोड के सिग्नल को देखकर वाहन की गति कम कर देते हैं। जबकि सिग्नल का पालन न करने वाले वहां से तेज गति से निकलते हैं। इससे दुर्घटना का डर बना रहता है। दिन में कई वाहन आपस में टकराते हैं।
कंपनी कभी नहीं करती ब्लिंकर मोड
स्मार्ट सिटी कंपनी के सीईओ गौरव बेनल ने बताया कि स्मार्ट सिटी कंपनी द्वारा ट्रैफिक सिग्नल को कभी भी ब्लिंकर मोड में नहीं किया जाता है। पुलिस सूची भेजकर बताती है कि किन चौराहे के सिग्नल को ब्लिंकर मोड में करना है।